​मैं हर रोज कहता हूं जहन से फिर न जाने क्यूँ तुम्हें सदायें नही आती सुनाई देने लगे जिस दिन तुम्हें खामोशी मेरी समझ जाना गहरा हुआ है प्यार मेरा। 

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