तेरा ख्वाबों में आना
शब की टुकड़ियों में सताना
बन गई है वजह इश्क की मेरे
अब होना न रुखसत ख्वाबों से
जीने लगीं हैं तुझमें हर दिन शामें मेरी
सपनों से तेरे सजने लगा ये जहा ये जहा…
न होना तू रुखसत कभी ए मेरे सनम
लगते हैं सर्द ये मौसम तेरी खामोशी से
हरदफा मांगता हूँ धूप तेरी हँसी की
न इन्कार करना
कभी ऐ खुदा तू मेरे
फूल खिलते हैं तेरी बातों से
तेरी खुश्बू से महकते हैं
जुल्फें तेरी राग है हवाओं के
भँवरे भी गुनगुनाते है यही
हाँ यही……

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