ढल जाना स्वप्नों से मेरे नयन के
चले जाना दूर इतना
न हो महसूस प्राणों को मेरे
तुम बीत गये एक दिन से
प्रात: बसे उर में सांझे चले गए
बरसे लोचन किस पीड़ा मे मेरे
सहमा-सहमा है उच्छवास
ह्रदय भी शोकाकुल है
कैसे करूँ अवसाने तेरी प्रीत का।

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