न जाने ये ढंग सीखा है कहाँ से
हर वक़्त तेरा बोलते रहना ये‌ बतिया आती है कहाँ से
तेरे दिल मे है शब्दों का भन्डार है तो एक शेर मेरा भी सुनते जाना
खुद को ‌मेरे गज़लों मे‌‌ गुनगुना ते जाना
थोडा फूलों मे रंग भरते जाना
चंचल चिडि़या सी फुदकते जाना
एक‌ उम्मीद जीने की जगाते जाना
वक्त रहा तो थोडा…. और बातें करते जाना।

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