जब भी आना चाहता हूँ तेरी ओर
मेरे दर्द मुझे रोक लेते हैं अपने दर्मियान
सोच के तेरे वास्ते
हर खुशी जीने की फेक आता हूँ गट्टर में
घुटन करने लगे है अब तो ये ज़ज्बात मन मे
क्या तुम भी न बताओगे इन्हें दूर करू कैसे
सच कहें तो थोड़े हि ज़िन्दा है इस गम मे अब हम।

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