दिल आ गया सीने से जुबां तक मेरे
कि तेरे दिल में ये बात अबतलक न पहुची
यूंही गुजर गई तेरे कानो से सदा
मेरे दिल की खुर्चों की शायद
मुर्दे भी सुनने लगे ख्वाहिशें अबतलक की
तुम अभी जिंदा हो क्यूँ फितरत तुम्हारी बदलने लगी।

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