तेरी आँखों से छलकता शबनम
पिया हूँ आज में तन्हाई मे
तेरा दर्द था कितना कड़वा ये जान पाया हूँ मैं
शायद अब बहुत देर हुई है तुम्हें समझने मे
रह गई एक हसी सी जिदंगी
मेरे दरमियान आते-आते।

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