एक पतंग को गिरते देखा है
एक पतंग को चढते देखा है
न हंस उसके हालात पे इतना
वो भी कभी आँसमा की बुलंदियां छुआ था
इठला ना अपने समय पे इतना
के जब तु गिरे तो उठ न पाये
ये जिंदगी का फलसफा है
कोई उम्रभर नबंर पहला नहीं रहता।

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