है जो कोई मेरा रहनुमा दर्द का वो
जो जुदा नही होता मुझसे कभी
जी में आया भर था वो हमनशी
गुजर गया वक्त सा दामन से मेरे
अब है यादों का कारवाँ
बंद है दिल का परिंदा जहाँ
गुजरी है राते बातों से उसकी
मलहम सी दर्द पे हंसी उसकी।

Advertisements