अब नहीं कोई जुस्तजू आने वाले पलों से
के कोई ख्वाब लाए
टूटा अक्सर है इन्सा ख्वाबों के आगे
अब हम हकीकत का ही ख्वाब देख लेंगे
न शिकवा करेंगी आँखें सपनो से
न गिले होंगे दिल के इनके टूटने का
रोया करते हैं अक्सर लोग अधूरे ख्वाब देख कर
हंस लेंगें हम हकीकत का हर ख्वाब पूरा देख के

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