न देखे सपने तेरे सिवा
हुए हो जब से खफा
हो गए अकेले हम कहीं
अधूरा किया है बस मुझे
टूटे सपने बस मेरे
ज़िंदा है तु कहीं मुझ में
न देखी ये आँखें…… ये आँसू
न एहसास रहा इस दर्द का
चलते गए वो रास्ते…. बढता गया फासला
अधूरा है जो मुझसे
होगा अकेला मुझसे
लेके कहाँ में जाऊँ
ख्वाब को तेरे बता दे

Advertisements