मैने बहुत दुख दर्द देखे हैं
लोगो को मुरत के आगे सिर टिकाते देखा है

फिजूल सा लगता  है ईश्वर भी कभी
मैने दर्द से भले लोगों को मरते देखा है

जो निवाला छीन रहा दूसरों का

उसे पनपते मैने देखा है
हजारों का नाश्ता करते हुए मैंने देश के
नेताओं को देखा है

जहाँ दरिद्र के बच्चों को दाना-दाना उठाते देखा है
सक्षम है जो पैसो की कमी से पीछे जाते देखा है मैने

जो पैसो से सक्षम उसे हर जगह बढते देखा है मैने
निचोड़ूगा में भी एक दिन रूह ऐसे जिस्मों से

जिनकी जेबों से गरीबी पलती जाती है़
छीन लेगें उस मेज से हम निवाले

जहाँ गरीबो के हिस्से से हजारों का नाश्ता किया जाता है

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