चल रहा है कोई अफसाने बनाते-बनाते
कह रहा है वो तुम्से कलमों के रास्ते
कुछ-कुछ बातें जो दिल की
बुन रहा वो पलों को तुम्से मिलने के वास्ते
चीरता गया कोई लम्हों के पन्नों को बेरहमी से
जिसमे लिखता आया था वो कई बार तेरा नाम
बेवक्त भी रोते गया वो दूरियों के बढते-बढते
चल रहा वो फिर भी न जाने किस वास्ते
आँखो को मुन्दे सीने में झुलसा दिल लेके

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