बंटने चला हूँ टुकडो में
दर्द इन हवाओ में छोड़ के
सुन जाना कभी गुजरते हुए उन राहों से
कुछ आवाजे मेरी तन्हाई की
कितना माँगा है तुझे तकदीर से
सुन लेना आँसूओं के गिरने कि आवाज
सुखे पत्तो पे
हो चला ये तन किसी और का
मन रह गया उन पलों में
जहाँ भूल आए तुम
भीनी सी खुशबु हवाओं में
मीठी सी एक हँसी उन फिजाओं में
मेरे दिल की लम्हा सी खुशी
जो मुझसे नाता तोड़ गयी तेरे जाने से
हर दिन आँखो में प्यास
दिल मे तेरे लिए प्यार लिए
बस गुजरा हूँ लम्हा सा
ढलती रही है शाम इन्तज़ार में
टूटता रहा हर पल वक्त से जैसे
तुम न आए बीते लम्हो से
खुद को बेच आया में गरदीशो में
मेरे मन अब तू ही बता दे
तुम बिन जीना क्या सजा है

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