आँसूओ की शिलन दिल पे छोड गये तुम
सच में रो नही पाये देख के बेरूखी तेरी
हर रोज हैं नया दर्द सहते
पहले दर्द था
अब नाम है लबो पे दर्द का एहसास नही होता
न जाने किस पल में आखिरी साँस है टिकी
कर गये हैं खुद को बेगाना
तेरे अन्जान दिल के शहर में
खौफ होता भी तो क्या
इस दर्द से ज्यादा दर्द क्या होता

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