एहसासों के दामन में जो मुहब्बत थी
वो बस इतिहासों मे है
अब तो जिस्मों से खेलना मुहब्बत बन गई है
टूट गयी सची चाहत भी बेकद्री के आगे
गिने चुने कुछ शख्स तो थे आज भी
न गिला इस दिल से न कोई शिकवा उस शख्स से
जो भूल गये दिल सिरहाने मे रख के

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