तेरी यादों के जहाँ में
न कोई शाम खुशी की
जीता हूँ हसी पल भी
जख्मो को सीते-सीते
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न खलिश हो तेरे दिल मे
न ये नाम हो लबो पे
भटका हूं दर बदर मे
न मिले तू कभी वफा से
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मे हूं वफा ये सच है
ये दिल न बेवफा है
राहें जुदा हैं तुमसे
बस एक यही खता है
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निगाहों मे बसे सपने
जो तुने किये अधूरे
टूटा हूं कतरा-कतरा
अस्खों के गिरते-गिरते
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इन साँसों की ये आहट
एक दर्द लेके आई
जब भी खुली ये आँखें
अन्धेरों मे तुम नजर आये।

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