लिखता गया एहसासों को
एक अरसा,एक लम्हा,एक पल
कहना तो था बहुत कुछ
सुनने वाले पे कहाँ वक्त रहा
अब हकीकत समझो या कोई मजाक
बस डायरी बन के रह गये मेरे जज्बात

Advertisements