लिखे कई शब्द मैने तुम आते तो मतलब मिल जाता
की मैने भी सच्ची हि आशिकी तुम आते तो सुबूत मिल जाता
अब फिरता हूँ झूठा बनके पागल सा
मेरे इश्क का मजाक है तुने बनाया
अब न कर पाऊँ गुफ्तगू कभी प्यार की
लोग कहते हैं प्यार तुम क्या जानो
है नफरत खुद से मुझे तुम जो हो मुझमें
वो कहते हैं खुद से इश्क नहीं जिसे वो क्या चाहेगा किसी को हद से
कभी कह न सका तुम हो जिदंगी मेरी
तुम नही तो क्या जानू मतलब जिदंगी का
अब सोचता हूँ तन्हा होके सब ठीक ही थे कहते
होता ये इश्क तो बेशख वो समझ पाते
ये इश्क क्या है में क्या जानू

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