आज इक छोटी सी दुनिया बनाने चला हूँ
मुहब्बत की नींव रखने चला हूँ
एहसासों की ईंटो से दीवार बनाने चला हूँ
महफूज हो हर साँस नफरतों से
ऐसी सोचो की नींव रखने चला हूँ
न दर्द न गम शुकु है यहाँ बेपनाह
रातो को आँखों की नींद
सुबह दिल का शुकून है यहाँ
दिल के आंगन में बैठ के
साँसों की कलम से लिखने को शब्द मिल जाते हैं
किसी दिलनशी पे नहीं इन बहारो कि दिलकशी पे लिख लिया करते है
कभी एक इंशा मे हर बहारें देख लेते थे
यहाँ हर इन-सा-ने बहार नजर आती हैं
कितनी हंसी है ये छोटी सी दुनिया
एहसासों की ईंटो से मुहब्बत की नींव रखी थी हमने

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