गुजरा कोई अरसा बेसुध सा
ज़िन्दगी पास से गुजरी
हम मौत की ओर चल दिये
अब हालत न सभली तो
ढूढने लगा कोई पल दिल के दराजों में
मिला एक खुशनुमा पल जिसमे तुम न थे शायद
जिन्दगी का मतलब कुछ दुसरा समझ गया शायद
अब चल दिया हूँ फिर जिंदगी की ओर
ये क्या रास्ते मुड़ गये खुशियों की ओर
हम अब तक समझते आये ये मुडेगा तुम्हारी ओर
करवट ली वक्त ने तो थाम लू ये आँचल
ढूढते रहे तेरे कदमों के निसा कहीं दूर इन राहों से
तुमने ये भी न कहा न भटको जरे-जरे मौत के
हम तो चल दिये कबके जिंदगी की राहों में
अब जो निसा मिला तेरी हमदर्दी का तो खुद पे हँस लिये
दर्दो को अपना गये हम तेरे वास्ते
और तुम हमे छोड के, आ गए सुकू की राह मे

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