देख के वो दरिया खेलने लगे
एक दूजे पे वो पानी गिराने लगे
बेपरवाह कोई लेटा है रेतों पे
कोई नए अन्दाज मे तस्वीरें खिंचाने लगे
कुछ जोड़ो मे पथरों पे बैठने लगे
कोई मंद-मंद कोई खिलखिला के हँसने लगे
मसरूफ है ये एक दूजे में
और हम तन्हा होके इनपे लिखने लगे
बैठा हूँ कहीं दूर मे भी पेड़ की छाँव में
तप्ती धूप मे आँखो की प्यास ढूढ रहा हूँ
अब नजर आया एक शख्स जो चेहरे पे नूर लिए है
छुवा वो पानी को एसे कि पानी भी गुलाबी लगे हैं
वो किनारे की लहरों पे उसका आँखे मूंद के उछलना
उसके पैरों का स्पर्श भी लहरों को गुदगुदाने लगा जैसे
उसके भीगे बालों के छींटे मेरे चेहरे तक आने लगे हैं
उसकी सेंतानियों मे कुछ खो सा गया हूँ
लगता है लहरों मे उसका रंग घुल सा गया है

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