हर तख्तो ताज किताबों से मिले है
अच्छाई बस दिल से आवे है
कभी दो आँखर समझ लो प्यारे
हम एे कब कहे हैं के इन से सीख भी न आवे है
हर दम पढे बस मंजिलों के लिए
मंजिल मिल जावे फिर सब भूल जावे है
जिंदगी चलती है तजुर्बों से
एे हम कब कहे कि
तजुर्बे मंजिलों मे मिला करते हैं।

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