आँखों के बहते अस्ख रोके है मैने
तुझे याद करने मे हरपल गंवाये है मैने
न समझे तु पर इश्क मे दिल से डूबा हूँ मे
अब लौटने का कोई समा नहीं दूर गुजर चुका हूँ मे
तुम साथ चलो या नही मे निकल चुका हूँ
अगर दर्द मे जीना ही मुहब्बत है तो ये रास्ता चुन चुका हूं मे
दिल रोये भले हरपल
अस्ख न बहाऊगा इन आँखों से ये वादा है
जब भी देखोगे हमे खुश दिखेंगे
बेशख चले जा मुझसे दूर इतना कि चाहो भी तो फिर मेरे न बन सको
बस खुश रहने का वादा करदो
इक अस्ख भी टपकना तेरी आँखों से गवारा नहीं मुझे
बनू खुद मे भी वजह इसकी ये जिदंगी गवारा नहीं मुझे

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