बैठा हू रास्ते मे कहीं तेरी राह दिखती है
झूठ ही सही पर तेरे आने की आस लिए बैठा हू
बेशक उम्र भर खफा रहे तू मुझसे एे दिलनशी
में आँखो मे तेरा इन्तजार लिए बैठा हू
थकती नही जबतक ये कलम हर दर्द हर इन्तजार-एे-बया लिखूंगा
मिले कभी रूख से तो पढ लेना हर कलमें-एे-वफा लिखी है
एतबार है तेरे आने का इसलिए निगाहों ने राह मे शबनम भरी है
आओ अगर लौट के कभी थोड़ी दिल मे मुहब्बत लेते आना
कही ये दरिया मुहब्बत का तुमसे परे रह न जाये

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