लिख जाऊंगा एक कहानी तेरे नाम
जिसमें हो ये जिंदगी तेरे नाम

लफ्जो की शैतानियों में तेरी मासूमियत भर जाऊंगा
तेरी हँसी को एक अदा दे जाऊंगा

हो कभी गुफ्तगू इस प्यार की वो लफ्ज लिख जाऊंगा साथ ये बेशक अधूरा रहा पर इसकी भी इक कशिश लिख जाऊंगा

मिले वक्त खुद से रूबरू होने का ऐसा एक पल लिख जाऊंगा
जिसमे तेरा नाम हो भरा ऐसी आशिकी लिख जाऊगा

वादा करो बस इतना जब भी जिक्र आए तो याद जरूर करोगे इश्क मेरा
इसे गुनगुनाये जो भी बस इन लफ्जो की हकीकत समझना

इन साँसों पे एतबार तो खुद नही है मुझे
खुद ये लफ्ज बया करने का वादा नही करते

होगा ये इश्क पूरा ऐसा एक पल लिख जाऊंगा
तेरे सिवा न हो किसी और का सपना ऐसा एक ख्वाब लिख जाऊंगा

दे जो दर्द तुझे उस पल को अधूरा लिख जाऊंगा
खुशी से छल्ले जो ऐसे आँसू लिख जाऊंगा

हुं अब इस जहां मे या रूखसते जिदंगी से
न हो कमी मेरी ऐसा साथ लिख जाऊंगा

तेरा नूर है तेरा तब्बसुम मुकमल लिख जाऊंगा
तेरी शैतानियों के लिए हर मौसमे बहार लिख जाऊंगा
हो बस तेरा इन्तजार जहां ऐसी जिंदगी लिख जाऊंगा बाहों मे भरने की तमन्ना थी ऐसी कई हसरतें लिख जाऊंगा

यूं तो न रहे एक पल साथ पर लाखों गुफ्तगू लिख जाऊंगा
खुदा की लिखी कहानी थी मेरी समझ न सके तुम
समझ सके जिसे ऐसी चाहत लिख जाऊंगा

दिखाए जो मेरी हकीकत की तस्वीर ऐसा आईना लिख जाऊंगा
मर के भी चाहे जो तुझे ऐसी रूह लिख जाऊंगा।

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