कोन है वो कोई न जाने
क्या चाहता है क्यूँ चाहता है कोई न जाने
बात तो ये है ए दोस्त तेरी हर अदा बुरा क्यूँ चाहती
क्या तू इनसा नहीं या तुझे दर्द नहीं होता
तेरे लफ्जो मे तुझे सजा नहीं मिलती इसका गर्व न कर
तेरी सजा तेरे अपनों का बुरा है
इसलिए कोई तुझे सजा नहीं देता
निर्दोष हैं वो लोग जिनका  रिस्ता है तुझसे
कायर नहीं वो जिनसे बेहयाई की तूने
एक दिन मिल अकेले मे कहीं
तो एहसास हो तुझे भी क्या औकात है तेरी ।

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