नादा था जो तुझे खुदा समझ बैठा
थोड़े प्यार के लिए अपने हरपल गवाँ बैठा
एक पल न दे सके जो उस से जन्नत माँग बैठा
खुश है वो जान के बहुत आशिक फिरते हैं उसके हमसे
इस गुरूर में वो मुझे न जान सके
और हम अब भी यही सोचते रहे कि हम उसे गँवा बैठे

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