ऐ खुदा अब और नहीं जिया जाता
उसकी उम्मीद कब तक करूँ
अब इस उम्मीद मे भी नहीं जिया जाता
उसका न आना तय है जनता हूँ मे
फिर भी झूठी उम्मीद मे जी रहा हूँ
बस एक झलक के लिए मर रहा हूँ
बेरहम है वो फिर से सितम करेगी
क्या इसे मेरी हंसी छीनने को बनाया है

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