सपने तो मैंने भी देखे  थे उसके लिए खता शायद ये थी

सपनों मे छोटा घर था शहर से दूर हंसी वादियाँ थी

चेन से सो सकते थे बिना चिंता किए कल की

थे तो सिर्फ महफ़िलों मे छोटे हम

मेने तो महफ़िलों का सपना नहीं सजाया था

दुनिया तो हर बात मे सुनाते है

बिना परवाह किए बस सपने देखे थे

बस ये नहीं सोचा  था सपने तो अकेले देखे थे

फिर किसी और की आरज़ू क्यूँ

अंजाने मे ही सही पर कर बैठे थे

अब सिर्फ मेरे पे  था तो मेरा जिगर और एहसास

जो साँसो पे भारी था जी तो मे लूगा ही

वैसे भी आसान जिंदगी जीने मे मजा न आता

सोचा  उसने भी शायद  साधे सपने देखे होंगे

सपने उसके मेरे दस गुना बड़े थे

जिसमे मे एक धूल कण सा महीन था

अब छोड़ दिये  उसके सपने बस याद काफी है

ये जरूर सोचना मेरी जान तुम अपनाए हो किसी को

जब हम हारे है। 

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