न किसी हंसी चेहरे की चाहत है मुझे न इश्क़ की चाहत है मुझे ये दिल तुझपे क्यूँ रूका यही सोचते रहे हम तुझे देख के मेरी रूह का एहसास हुआ बेजान शरीर मे अब तेरे दूर जाने जिद भला सहें कैसे हम रोकूँ भी तुम्हें किस उम्मीद मे हर सांस मेरी है मुश्किल मे रोना चाहूँ बार-बार पर आँसू नहीं निकलते इन आंखो से आखिर इस दर्द को कब तक दिल मे रखे हम

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