माना की अंधेरों मे जीना मुश्किल होता है एक आरज़ू तो उजाले की होती है किसी को चाह के भी ठोकर खाई एक उम्मीद मे आज भी आस लगाए बैठे तो हैं काश उसकी मंज़िल का रास्ता ही हमसे होके गुजरे आके गले लगाए न सही देख के मुस्कराये तो सही

Advertisements