काश के ये सोहरत छिन जाए हमसे रातों की नींद उड़ा ली जिसने तमना तो की थी इसे पाने की अब न एक पल सुकू है “सच ही कहा था किसी ने मुफ्त की चीज़े अछी नहीं होती ” हम तो खुद को ही गवा बैठे तेरी यादें पा के

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