मेरी जीत तेरी गलती पे टिकी है हरपल तू ही तो नहीं जीत सकता या फिर हर दम मुझे ही हरा नहीं सकता मेहनत करता हूँ हर दिन पाने की देखते हैं तू कब तक गलती करता है मानता हूँ तू हरदम सीखता है गलतियों से पर मेहनत से तू भी घबरा जाता है सालो की मेहनत से मांगा भी तो तेरी मौत उस शैतान ने पर तेरा करम तो देखो हँसते-हँसते स्वीकार लिया तूने यही तेरी बात है जिसे मे चाहता हूँ वरना तुझसे कोई लगाव नहीं मेरा हमने तो मांगा ही क्या था बस एक दीदार वो भी उसका जो तुझे भी प्यारा है तभी तो हरदम दूर रखता है तू मुझसे मिले जो कभी तो तू भी अधूरा है बिना दीदार के मिटा दिया मुझे तो मेरी रूह भी कहेगी तू पूरा है अब रखीं हैं दो सरतें तेरे आगे या इंतज़ार खत्म कर या अपनी झूठी शान

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