कहते थे वो प्यार करते हो मुझसे
ये कहते हो तुम
मेरी खामोशी क्या कहती है
ये तो समझ ही नहीं पाते तुम
कौन कमबख्त ये समझाये उन्हे
हम में यही तो खूबी थी
न समझ पाते जो तेरी खामोशी
तो क्या यूं दूर जाते हम
सच तो ये है न समझ पाये तुम मेरी खामोशी
जो कहता था कुछ न जाने उलझन मे क्या कहता था बेशुमार प्यार था इन आँखों मे झलकता
झलकिया पहचाने की शायद तेरी आदत न थी ।

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