दर्दे दिल में तूफान उठता है तो सर फटने लगता है 
चाहा जो दर्द कम करना दरदों से ही रिश्ता जोड़ गए 
लगी थी जो इबादत उस पल अब वो गलती लगती है 
चाहत समझ बैठे थे जिसे उसे सब गलत कहेंगे सोचा न था 
अब समझे भी तो कब जब एक पल उसे भूला नहीं सकते
Advertisements