मुहब्बत की इस दिल ने सब की तरह
बस इल्ज़ाम हमे ही दिये गए
मे बस एहसास चाहता हूँ
ये मेरा दिल ही समझते रह गया
लोगो ने दिये तो बस हमे गंदे नाम
हमने उस नाम मे भी आवाज दे दी
खुद से कहते रहे मे गलत नहीं हूँ
पर कहे भी तो कौन हमे सब ठीक है
लोग सब मुझ जैसे बुरे तो नहीं।

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