हमने दिल के जरे जरे से चाहा उसे
फिर क्यूँ सिर्फ चाह ही रह गयी उसकी
क्या लिखी मेरी कहानी अधूरी रह गयी
या खयाल ही न रहा जिंदगी का मेरी
हर मंजर तो अधूरे छोड़े तूने
बस एक चाह ही बक्स जीने की मुझे
या शांत कर जा सारे दर्द ये बेचैनी
बस साँसो का शीलशिला तोड़ के।

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