इस कदर चाहा तुझको हर मक़ाम छूट गए
जब भी चाहा कुछ पाना बस नजरों मे रही तू
कर गए खुद को फनाह तेरे इश्क़ मे
मांगा जो अब तन्हा होके साथ तेरा
कह दिया तूने तू मेरे काबिल नहीं
क्या ये भी न जाना तूने मेरे अवसर अक्सर छूट गए थे तेरी चाह लिए
पा सकते है आज भी सबकुछ सिवा तेरे
है तो बस ये अफसोस सब तो खोया ही
तुझे भी पाना भूल गए।

Advertisements