तेरी हर अदा भाति है मुझको
कुछ पाना तेरा खलता है मुझको
फिर भी तेरा मुस्कुराना भाता है मुझको
अब तो उन मंज़िलों से भी प्यार कर गए हम
जिनसे सुकून आता है तुम्हें
मे जलता हूँ उस वजह से अक्सर
जो दूर ले जाए मुझे तुमसे।

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