खुदा की बनाई इबादत हो तुम
मेरे दिल मे बसी चाहत हो तुम
कैसे बताएं मेरे लिए क्या हो तुम
कुछ आर्सो के बाद न देख पाएंगे तुम्हें
कैसे कहे क्या बेबसी है ये
चलो कर लेंगे ये बेबसी भी दूर
तेरी चाहत साँसो मे बसा के खुद को भूल जाएंगे हम ये नहीं की याद नहीं करेंगे
घर तो होगा तेरी यादों का तेरा
वो अक्ष रह जाएगा
जिसकी एक धुंधली सी तस्वीर
तब भी इस दिल मे रह जाएगी।

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